उत्तराखण्ड में वन जीव - संरक्षण (PART 1)


वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 6 वन्य जीव विहार, 2 संरक्षण अरिक्षित, एक उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान तथा एक जैव सुरक्षित क्षेत्र है।
वन्यजीव गणना 2008 के अनुसार राज्य में सर्वाधिक संख्या वाला वन्य जीव चीतल ( 53,730 ) और  पहली एंव दूसरी सबसे कम संख्या वाले जीव क्रमशः भूरा भालू (14) बारहसिंहों (100) की हैं।

राज्य के प्रथम वन्य जीव  संरक्षण केन्द्र के रूप में 1935 ईo  में देहरादून में मोतीचूर वन्य जीव बिहार की स्थापना की गयी  थी। जो कि 1983 ईo  में राजा जी राष्ट्रीय उद्यान में समाहित की गयी थी। जो कि 1983 ईo में राजा जी राष्ट्रीय उद्यान में समाहित हो गया।

1. कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान -  1936 ईo में राज्य के तत्कालीन गवर्नर सर हेली के नाम से स्थापित हैली राष्ट्रीय उद्यान भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का भी प्रथम राष्ट्रीय उद्यान  हैं  स्वतन्त्रता के बाद इसका नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखा गया । लेकिन वर्ष 1957 ईo   महान  प्रकृति प्रेमी जिम कार्बेट की स्मृति में इसका नाम एक बार पुनः बदलकर कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया।
520.82 वर्ग किमीo  क्षेत्र का यह उद्यान पौढ़ी (312.76) वर्ग किमीo और नैनीताल (208.8) वर्ग किमी॰ जिलों मे विस्तृत हैं।

  • इस पार्क में प्रवेश के लिए नैनीताल जनपद के ढ़िकाला में प्रवेश द्वारा बनाया जाता है,  जो कि नैनीताल जिला मुख्या लय से 144 किमी. दूर है। यह क्षेत्र  नगरपालिका रामनगर नैनीताल से  काफी निकट है।
  •  इस पार्क के मध्य में पाटली दून स्थित है।
  • 1 नवम्बर 1973 को इसे भारत का पहला बाघ संरक्षित घोषित किया गया ।  संरक्षित क्षेत्र की घोषणा के बाद पार्क में शेरों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हुई हैं। इसे हाथी परियोजना में भी  शामिल किया गाया है।
  •  इस पार्क में लगभग 570 पक्षी प्रजातियाँ व लगभग 75 स्तनधारी जीव पाये जाते हैं। मगरमच्छ, चीतल,  सांभर, कांकडद्य, बाघ, हाथी, तेंदुआ, अजगर, हिरन और महशीर आदि यहाँ के मुख्य जीव हैं। 

  •  राज्य के सभी उद्यानों में सर्वाधिक पर्यटन इसी उद्यान और फूलों की घाटी में आते हैं। 

2. गोविन्द राष्ट्रीय उद्यान - यह उद्यान उत्तरकाशी जनपद में स्थित है। इसकी स्थापना 1980 ई. में की गयी थी। यह उ़द्यान 472 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ हैं।  राजा जी  राष्ट्रीय उद्यान , देहरादून, से  इस उद्यान का संचालन होता हैं।  यहां भूरा भालू, कस्तरी मृग, हिम तेंदूआ, भारत , थार  ,काला भालू तथा  ट्रेगौपान,  कलीज,   मोनाल, कोकलास ,आदि पशु - पक्षी मुख्य आकर्षण है। भोजपत्र, देवदार, बांज आदि पर्वतीय वनस्पति यहां देखने को मिलती है।
उत्तराखण्ड में वन जीव - संरक्षण (PART 1) उत्तराखण्ड में वन जीव - संरक्षण  (PART 1) Reviewed by gkall on September 04, 2018 Rating: 5

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